पंचांग 15 जून 2016

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 जून 2016 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय05:57
सूर्यास्त19:12
चंद्रोदय14:58
चंद्रास्त02:55 (16 जून)
मास:
ज्येष्ठ (अमांत)
संवत:
शक 1938 · विक्रम (चैत्रादि) 2073
संवत्सर:
दुर्मुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
कन्या 06:47 तक, फिर तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल दशमी 07:27 तक, फिर शुक्ल एकादशी 09:54 (16 जून) तक
नक्षत्र
चित्रा 20:19 तक, फिर स्वाती 23:16 (16 जून) तक
योग
वरीयान 06:14 तक, फिर परिघ 07:15 (16 जून) तक
करण
गर 07:27 तक, फिर वणिज 20:42 तक, फिर विष्टि 09:54 (16 जून) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 13:01परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:35 – 14:14
  • यमगंड07:37 – 09:16
  • गुलिक काल10:55 – 12:35

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)05:57 – 07:37
  • अमृत(शुभ)07:37 – 09:16
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:16 – 10:55
  • शुभ(शुभ)10:55 – 12:35
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:35 – 14:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:53
  • चर(सामान्य)15:53 – 17:32
  • लाभ(शुभ)17:32 – 19:12

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:12 – 20:32
  • शुभ(शुभ)20:32 – 21:53
  • अमृत(शुभ)21:53 – 23:14
  • चर(सामान्य)23:14 – 00:35 (16 जून)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:35 (16 जून) – 01:55 (16 जून)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:55 (16 जून) – 03:16 (16 जून)
  • लाभ(शुभ)03:16 (16 जून) – 04:37 (16 जून)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:37 (16 जून) – 05:58 (16 जून)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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