पंचांग 17 जुलाई 2016

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 जुलाई 2016 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:07
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय16:59
चंद्रास्त04:31 (18 जुल॰)
मास:
आषाढ़ (अमांत)
संवत:
शक 1938 · विक्रम (चैत्रादि) 2073
संवत्सर:
दुर्मुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कर्क
चंद्र राशि:
वृश्चिक 13:46 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 04:23 (18 जुल॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 04:40 (19 जुल॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 13:46 तक, फिर मूल 15:02 (18 जुल॰) तक
योग
ब्रह्म 17:45 तक, फिर इन्द्र 17:12 (18 जुल॰) तक
करण
कौलव 16:01 तक, फिर तैतिल 04:23 (18 जुल॰) तक, फिर गर 16:35 (18 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
  • राहु काल17:35 – 19:14
  • यमगंड12:40 – 14:19
  • गुलिक काल15:57 – 17:35

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:07 – 07:45
  • चर(सामान्य)07:45 – 09:23
  • लाभ(शुभ)09:23 – 11:02
  • अमृत(शुभ)11:02 – 12:40
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:19
  • शुभ(शुभ)14:19 – 15:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:57 – 17:35
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:35 – 19:14

रात

  • शुभ(शुभ)19:14 – 20:35
  • अमृत(शुभ)20:35 – 21:57
  • चर(सामान्य)21:57 – 23:19
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:19 – 00:40 (18 जुल॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:40 (18 जुल॰) – 02:02 (18 जुल॰)
  • लाभ(शुभ)02:02 (18 जुल॰) – 03:24 (18 जुल॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (18 जुल॰) – 04:45 (18 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)04:45 (18 जुल॰) – 06:07 (18 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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