पंचांग 27 जुलाई 2016
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
27 जुलाई 2016 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:10
सूर्यास्त19:11
चंद्रोदय00:56 (28 जुल॰)
चंद्रास्त13:00
- मास:
- आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1938 · विक्रम (चैत्रादि) 2073
- संवत्सर:
- दुर्मुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी 15:21 तक, फिर कृष्ण नवमी 13:04 (28 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- अश्विनी 09:40 तक, फिर भरणी 08:10 (28 जुल॰) तक
- योग
- शूल 19:28 तक, फिर गण्ड 16:33 (28 जुल॰) तक
- करण
- कौलव 15:21 तक, फिर तैतिल 02:13 (28 जुल॰) तक, फिर गर 13:04 (28 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:40 – 14:18
- यमगंड07:48 – 09:25
- गुलिक काल11:03 – 12:40
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:10 – 07:48
- अमृत(शुभ)07:48 – 09:25
- काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 11:03
- शुभ(शुभ)11:03 – 12:40
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:56
- चर(सामान्य)15:56 – 17:33
- लाभ(शुभ)17:33 – 19:11
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:11 – 20:33
- शुभ(शुभ)20:33 – 21:56
- अमृत(शुभ)21:56 – 23:18
- चर(सामान्य)23:18 – 00:41 (28 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:41 (28 जुल॰) – 02:03 (28 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (28 जुल॰) – 03:26 (28 जुल॰)
- लाभ(शुभ)03:26 (28 जुल॰) – 04:48 (28 जुल॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:48 (28 जुल॰) – 06:10 (28 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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