पंचांग 15 मार्च 2017
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
15 मार्च 2017 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:42
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदय21:10
चंद्रास्त08:29
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1938 · विक्रम (चैत्रादि) 2073
- संवत्सर:
- दुर्मुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- कन्या 09:07 तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण तृतीया 23:17 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 01:11 (17 मार्च) तक
- नक्षत्र
- चित्रा 22:10 तक, फिर स्वाती 00:34 (17 मार्च) तक
- योग
- ध्रुव 02:04 (16 मार्च) तक, फिर व्याघात 02:30 (17 मार्च) तक
- करण
- वणिज 10:30 तक, फिर विष्टि 23:17 तक, फिर बव 12:11 (16 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:19 – 13:07परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:43 – 14:13
- यमगंड08:13 – 09:43
- गुलिक काल11:13 – 12:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:42 – 08:13
- अमृत(शुभ)08:13 – 09:43
- काल(वर्जित (परंपरा))09:43 – 11:13
- शुभ(शुभ)11:13 – 12:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:43 – 14:13
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:14
- लाभ(शुभ)17:14 – 18:44
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:44 – 20:14
- शुभ(शुभ)20:14 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:13
- चर(सामान्य)23:13 – 00:43 (16 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:43 (16 मार्च) – 02:12 (16 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:12 (16 मार्च) – 03:42 (16 मार्च)
- लाभ(शुभ)03:42 (16 मार्च) – 05:12 (16 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:12 (16 मार्च) – 06:42 (16 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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