पंचांग 17 मार्च 2017

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 मार्च 2017 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:41
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदय22:48
चंद्रास्त09:48
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1938 · विक्रम (चैत्रादि) 2073
संवत्सर:
दुर्मुख (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
तुला 20:36 तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 03:26 (18 मार्च) तक, फिर कृष्ण षष्ठी 05:53 (19 मार्च) तक
नक्षत्र
विशाखा 03:18 (18 मार्च) तक, फिर अनुराधा 06:14 (19 मार्च) तक
योग
हर्षण 03:12 (18 मार्च) तक, फिर वज्र 04:02 (19 मार्च) तक
करण
कौलव 14:16 तक, फिर तैतिल 03:26 (18 मार्च) तक, फिर गर 16:39 (18 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:18 – 13:07
  • राहु काल11:12 – 12:43
  • यमगंड15:43 – 17:14
  • गुलिक काल08:11 – 09:42

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:41 – 08:11
  • लाभ(शुभ)08:11 – 09:42
  • अमृत(शुभ)09:42 – 11:12
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:12 – 12:43
  • शुभ(शुभ)12:43 – 14:13
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:13 – 15:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
  • चर(सामान्य)17:14 – 18:44

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:44 – 20:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:14 – 21:43
  • लाभ(शुभ)21:43 – 23:13
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:42 (18 मार्च)
  • शुभ(शुभ)00:42 (18 मार्च) – 02:12 (18 मार्च)
  • अमृत(शुभ)02:12 (18 मार्च) – 03:41 (18 मार्च)
  • चर(सामान्य)03:41 (18 मार्च) – 05:10 (18 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:10 (18 मार्च) – 06:40 (18 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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