पंचांग 21 अगस्त 2017
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
21 अगस्त 2017 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:17
सूर्यास्त18:57
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:43
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1939 · विक्रम (चैत्रादि) 2074
- संवत्सर:
- हेमलंबी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- कर्क 15:51 तक, फिर सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण अमावस्या 00:00 (22 अग॰) तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 22:15 (22 अग॰) तक
- नक्षत्र
- आश्लेषा 15:51 तक, फिर मघा 14:43 (22 अग॰) तक
- योग
- वरीयान 08:47 तक, फिर परिघ 06:03 (22 अग॰) तक, फिर शिव 03:40 (23 अग॰) तक
- करण
- चतुष्पद 13:02 तक, फिर नाग 00:00 (22 अग॰) तक, फिर किंस्तुघ्न 11:04 (22 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:02
- राहु काल07:52 – 09:27
- यमगंड11:02 – 12:37
- गुलिक काल14:12 – 15:47
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:17 – 07:52
- काल(वर्जित (परंपरा))07:52 – 09:27
- शुभ(शुभ)09:27 – 11:02
- रोग(वर्जित (परंपरा))11:02 – 12:37
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:12
- चर(सामान्य)14:12 – 15:47
- लाभ(शुभ)15:47 – 17:22
- अमृत(शुभ)17:22 – 18:57
रात
- चर(सामान्य)18:57 – 20:22
- रोग(वर्जित (परंपरा))20:22 – 21:47
- काल(वर्जित (परंपरा))21:47 – 23:12
- लाभ(शुभ)23:12 – 00:37 (22 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:37 (22 अग॰) – 02:02 (22 अग॰)
- शुभ(शुभ)02:02 (22 अग॰) – 03:27 (22 अग॰)
- अमृत(शुभ)03:27 (22 अग॰) – 04:52 (22 अग॰)
- चर(सामान्य)04:52 (22 अग॰) – 06:17 (22 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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