पंचांग 7 अक्टूबर 2017

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

7 अक्टूबर 2017 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:18
चंद्रोदय19:47
चंद्रास्त07:43
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1939 · विक्रम (चैत्रादि) 2074
संवत्सर:
हेमलंबी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 19:36 तक, फिर कृष्ण तृतीया 16:58 (8 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
अश्विनी 17:50 तक, फिर भरणी 15:58 (8 अक्टू॰) तक
योग
हर्षण 22:32 तक, फिर वज्र 19:13 (8 अक्टू॰) तक
करण
तैतिल 08:52 तक, फिर गर 19:36 तक, फिर वणिज 06:18 (8 अक्टू॰) तक, फिर विष्टि 16:58 (8 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:45
  • राहु काल09:24 – 10:53
  • यमगंड13:51 – 15:20
  • गुलिक काल06:26 – 07:55

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:26 – 07:55
  • शुभ(शुभ)07:55 – 09:24
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:22
  • चर(सामान्य)12:22 – 13:51
  • लाभ(शुभ)13:51 – 15:20
  • अमृत(शुभ)15:20 – 16:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:49 – 18:18

रात

  • लाभ(शुभ)18:18 – 19:49
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:49 – 21:20
  • शुभ(शुभ)21:20 – 22:51
  • अमृत(शुभ)22:51 – 00:22 (8 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)00:22 (8 अक्टू॰) – 01:53 (8 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:53 (8 अक्टू॰) – 03:24 (8 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:24 (8 अक्टू॰) – 04:55 (8 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)04:55 (8 अक्टू॰) – 06:26 (8 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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