पंचांग 31 अक्टूबर 2017

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 अक्टूबर 2017 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:02
चंद्रोदय15:25
चंद्रास्त03:32 (1 नव॰)
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1939 · विक्रम (चैत्रादि) 2074
संवत्सर:
हेमलंबी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
कुंभ 01:44 (1 नव॰) तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 18:56 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 17:57 (1 नव॰) तक
नक्षत्र
शतभिषा 07:37 तक, फिर पूर्वभाद्रपदा 07:40 (1 नव॰) तक
योग
ध्रुव 18:13 तक, फिर व्याघात 16:18 (1 नव॰) तक
करण
वणिज 07:06 तक, फिर विष्टि 18:56 तक, फिर बव 06:32 (1 नव॰) तक, फिर बालव 17:57 (1 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल15:10 – 16:36
  • यमगंड09:25 – 10:52
  • गुलिक काल12:18 – 13:44

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:33 – 07:59
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:59 – 09:25
  • चर(सामान्य)09:25 – 10:52
  • लाभ(शुभ)10:52 – 12:18
  • अमृत(शुभ)12:18 – 13:44
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:44 – 15:10
  • शुभ(शुभ)15:10 – 16:36
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:36 – 18:02

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:02 – 19:36
  • लाभ(शुभ)19:36 – 21:10
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:10 – 22:44
  • शुभ(शुभ)22:44 – 00:18 (1 नव॰)
  • अमृत(शुभ)00:18 (1 नव॰) – 01:52 (1 नव॰)
  • चर(सामान्य)01:52 (1 नव॰) – 03:26 (1 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:26 (1 नव॰) – 05:00 (1 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:00 (1 नव॰) – 06:34 (1 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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