पंचांग 26 दिसंबर 2017

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

26 दिसंबर 2017 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:04
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय12:37
चंद्रास्त00:56 (27 दिस॰)
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1939 · विक्रम (चैत्रादि) 2074
संवत्सर:
हेमलंबी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 02:44 (27 दिस॰) तक, फिर शुक्ल नवमी 01:55 (28 दिस॰) तक
नक्षत्र
उत्तरभाद्रपदा 01:47 (27 दिस॰) तक, फिर रेवती 01:36 (28 दिस॰) तक
योग
वरीयान 05:27 (27 दिस॰) तक, फिर परिघ 03:31 (28 दिस॰) तक
करण
विष्टि 14:50 तक, फिर बव 02:44 (27 दिस॰) तक, फिर बालव 14:25 (27 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 12:57
  • राहु काल15:20 – 16:43
  • यमगंड09:49 – 11:12
  • गुलिक काल12:35 – 13:57

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:04 – 08:27
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:27 – 09:49
  • चर(सामान्य)09:49 – 11:12
  • लाभ(शुभ)11:12 – 12:35
  • अमृत(शुभ)12:35 – 13:57
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:57 – 15:20
  • शुभ(शुभ)15:20 – 16:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:43 – 18:05

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:05 – 19:43
  • लाभ(शुभ)19:43 – 21:20
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:20 – 22:57
  • शुभ(शुभ)22:57 – 00:35 (27 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)00:35 (27 दिस॰) – 02:12 (27 दिस॰)
  • चर(सामान्य)02:12 (27 दिस॰) – 03:50 (27 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:50 (27 दिस॰) – 05:27 (27 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:27 (27 दिस॰) – 07:04 (27 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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