पंचांग 5 सितंबर 2018
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
5 सितंबर 2018 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:45
चंद्रोदय02:31 (6 सित॰)
चंद्रास्त15:00
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1940 · विक्रम (चैत्रादि) 2075
- संवत्सर:
- विलंबी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 15:01 तक, फिर कृष्ण एकादशी 12:15 (6 सित॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 17:14 तक, फिर पुनर्वसु 15:13 (6 सित॰) तक
- योग
- सिद्धि 08:46 तक, फिर व्यतीपात 05:30 (6 सित॰) तक, फिर वरीयान 01:59 (7 सित॰) तक
- करण
- विष्टि 15:01 तक, फिर बव 01:40 (6 सित॰) तक, फिर बालव 12:15 (6 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:58परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:33 – 14:06
- यमगंड07:53 – 09:26
- गुलिक काल11:00 – 12:33
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:20 – 07:53
- अमृत(शुभ)07:53 – 09:26
- काल(वर्जित (परंपरा))09:26 – 11:00
- शुभ(शुभ)11:00 – 12:33
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:33 – 14:06
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:06 – 15:39
- चर(सामान्य)15:39 – 17:12
- लाभ(शुभ)17:12 – 18:45
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:45 – 20:12
- शुभ(शुभ)20:12 – 21:39
- अमृत(शुभ)21:39 – 23:06
- चर(सामान्य)23:06 – 00:33 (6 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:33 (6 सित॰) – 02:00 (6 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:00 (6 सित॰) – 03:27 (6 सित॰)
- लाभ(शुभ)03:27 (6 सित॰) – 04:53 (6 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:53 (6 सित॰) – 06:20 (6 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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