पंचांग 17 अगस्त 2020

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 अगस्त 2020 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:16
सूर्यास्त19:00
चंद्रोदय05:14 (18 अग॰)
चंद्रास्त17:47
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1942 · विक्रम (चैत्रादि) 2077
संवत्सर:
शार्वरी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 12:35 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 10:40 (18 अग॰) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 06:44 तक, फिर पुष्य 05:43 (18 अग॰) तक, फिर आश्लेषा 04:08 (19 अग॰) तक
योग
व्यतीपात 03:31 (18 अग॰) तक, फिर वरीयान 00:34 (19 अग॰) तक
करण
वणिज 12:35 तक, फिर विष्टि 23:42 तक, फिर शकुनि 10:40 (18 अग॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:03
  • राहु काल07:52 – 09:27
  • यमगंड11:03 – 12:38
  • गुलिक काल14:13 – 15:49

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:16 – 07:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:52 – 09:27
  • शुभ(शुभ)09:27 – 11:03
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:38
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:13
  • चर(सामान्य)14:13 – 15:49
  • लाभ(शुभ)15:49 – 17:24
  • अमृत(शुभ)17:24 – 19:00

रात

  • चर(सामान्य)19:00 – 20:24
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:24 – 21:49
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:49 – 23:13
  • लाभ(शुभ)23:13 – 00:38 (18 अग॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:38 (18 अग॰) – 02:03 (18 अग॰)
  • शुभ(शुभ)02:03 (18 अग॰) – 03:27 (18 अग॰)
  • अमृत(शुभ)03:27 (18 अग॰) – 04:52 (18 अग॰)
  • चर(सामान्य)04:52 (18 अग॰) – 06:17 (18 अग॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें