पंचांग 17 सितंबर 2020

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 सितंबर 2020 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:34
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:49
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1942 · विक्रम (चैत्रादि) 2077
संवत्सर:
शार्वरी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
सिंह 15:07 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 16:30 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 12:51 (18 सित॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 09:48 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 06:59 (18 सित॰) तक
योग
शुभ 23:51 तक, फिर शुक्ल 19:42 (18 सित॰) तक
करण
नाग 16:30 तक, फिर किंस्तुघ्न 02:41 (18 सित॰) तक, फिर बव 12:51 (18 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:53
  • राहु काल14:00 – 15:31
  • यमगंड06:22 – 07:54
  • गुलिक काल09:25 – 10:57

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:22 – 07:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:57
  • चर(सामान्य)10:57 – 12:28
  • लाभ(शुभ)12:28 – 14:00
  • अमृत(शुभ)14:00 – 15:31
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:31 – 17:03
  • शुभ(शुभ)17:03 – 18:34

रात

  • अमृत(शुभ)18:34 – 20:03
  • चर(सामान्य)20:03 – 21:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:31 – 23:00
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:00 – 00:28 (18 सित॰)
  • लाभ(शुभ)00:28 (18 सित॰) – 01:57 (18 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:57 (18 सित॰) – 03:25 (18 सित॰)
  • शुभ(शुभ)03:25 (18 सित॰) – 04:54 (18 सित॰)
  • अमृत(शुभ)04:54 (18 सित॰) – 06:22 (18 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें