पंचांग 19 अक्टूबर 2022

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 अक्टूबर 2022 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:09
चंद्रोदय01:49 (20 अक्टू॰)
चंद्रास्त14:25
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
संवत्सर:
शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण नवमी 14:13 तक, फिर कृष्ण दशमी 16:05 (20 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
पुष्य 08:01 तक, फिर आश्लेषा 10:30 (20 अक्टू॰) तक
योग
साध्य 17:31 तक, फिर शुभ 17:51 (20 अक्टू॰) तक
करण
गर 14:13 तक, फिर वणिज 03:13 (20 अक्टू॰) तक, फिर विष्टि 16:05 (20 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:42परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:19 – 13:46
  • यमगंड07:56 – 09:24
  • गुलिक काल10:51 – 12:19

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:29 – 07:56
  • अमृत(शुभ)07:56 – 09:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:51
  • शुभ(शुभ)10:51 – 12:19
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:19 – 13:46
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:46 – 15:14
  • चर(सामान्य)15:14 – 16:41
  • लाभ(शुभ)16:41 – 18:09

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:09 – 19:41
  • शुभ(शुभ)19:41 – 21:14
  • अमृत(शुभ)21:14 – 22:47
  • चर(सामान्य)22:47 – 00:19 (20 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:19 (20 अक्टू॰) – 01:52 (20 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:52 (20 अक्टू॰) – 03:24 (20 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)03:24 (20 अक्टू॰) – 04:57 (20 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:57 (20 अक्टू॰) – 06:29 (20 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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