पंचांग 2 दिसंबर 2022
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
2 दिसंबर 2022 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:50
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय14:07
चंद्रास्त02:26 (3 दिस॰)
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
- संवत्सर:
- शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 05:39 (3 दिस॰) तक, फिर शुक्ल एकादशी 05:35 (4 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 05:45 (3 दिस॰) तक, फिर रेवती 06:16 (4 दिस॰) तक
- योग
- वज्र 07:29 तक, फिर सिद्धि 05:50 (3 दिस॰) तक, फिर व्यतीपात 04:34 (4 दिस॰) तक
- करण
- तैतिल 17:53 तक, फिर गर 05:39 (3 दिस॰) तक, फिर वणिज 17:33 (3 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:01 – 12:45
- राहु काल11:00 – 12:23
- यमगंड15:10 – 16:33
- गुलिक काल08:14 – 09:37
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:50 – 08:14
- लाभ(शुभ)08:14 – 09:37
- अमृत(शुभ)09:37 – 11:00
- काल(वर्जित (परंपरा))11:00 – 12:23
- शुभ(शुभ)12:23 – 13:47
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:47 – 15:10
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:10 – 16:33
- चर(सामान्य)16:33 – 17:56
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:33
- काल(वर्जित (परंपरा))19:33 – 21:10
- लाभ(शुभ)21:10 – 22:47
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:47 – 00:24 (3 दिस॰)
- शुभ(शुभ)00:24 (3 दिस॰) – 02:00 (3 दिस॰)
- अमृत(शुभ)02:00 (3 दिस॰) – 03:37 (3 दिस॰)
- चर(सामान्य)03:37 (3 दिस॰) – 05:14 (3 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:14 (3 दिस॰) – 06:51 (3 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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