पंचांग 20 दिसंबर 2022
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 दिसंबर 2022 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:01
सूर्यास्त18:02
चंद्रोदय04:35 (21 दिस॰)
चंद्रास्त15:12
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
- संवत्सर:
- शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- तुला 02:57 (21 दिस॰) तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 00:45 (21 दिस॰) तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 22:16 (21 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- स्वाती 09:54 तक, फिर विशाखा 08:33 (21 दिस॰) तक
- योग
- सुकर्मा 00:39 (21 दिस॰) तक, फिर धृति 21:25 (21 दिस॰) तक
- करण
- कौलव 13:45 तक, फिर तैतिल 00:45 (21 दिस॰) तक, फिर गर 11:36 (21 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:54
- राहु काल15:17 – 16:39
- यमगंड09:46 – 11:09
- गुलिक काल12:31 – 13:54
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:01 – 08:24
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:24 – 09:46
- चर(सामान्य)09:46 – 11:09
- लाभ(शुभ)11:09 – 12:31
- अमृत(शुभ)12:31 – 13:54
- काल(वर्जित (परंपरा))13:54 – 15:17
- शुभ(शुभ)15:17 – 16:39
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:39 – 18:02
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:02 – 19:40
- लाभ(शुभ)19:40 – 21:17
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:17 – 22:54
- शुभ(शुभ)22:54 – 00:32 (21 दिस॰)
- अमृत(शुभ)00:32 (21 दिस॰) – 02:09 (21 दिस॰)
- चर(सामान्य)02:09 (21 दिस॰) – 03:47 (21 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:47 (21 दिस॰) – 05:24 (21 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:24 (21 दिस॰) – 07:01 (21 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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