पंचांग 11 जनवरी 2023

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 जनवरी 2023 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:15
चंद्रोदय21:59
चंद्रास्त10:11
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
संवत्सर:
शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 14:31 तक, फिर कृष्ण पंचमी 16:37 (12 जन॰) तक
नक्षत्र
मघा 11:50 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 14:24 (12 जन॰) तक
योग
आयुष्मान 12:01 तक, फिर सौभाग्य 12:31 (12 जन॰) तक
करण
बालव 14:31 तक, फिर कौलव 03:37 (12 जन॰) तक, फिर तैतिल 16:37 (12 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:04परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:42 – 14:05
  • यमगंड08:32 – 09:55
  • गुलिक काल11:19 – 12:42

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:09 – 08:32
  • अमृत(शुभ)08:32 – 09:55
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:55 – 11:19
  • शुभ(शुभ)11:19 – 12:42
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:42 – 14:05
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:05 – 15:28
  • चर(सामान्य)15:28 – 16:52
  • लाभ(शुभ)16:52 – 18:15

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:15 – 19:52
  • शुभ(शुभ)19:52 – 21:28
  • अमृत(शुभ)21:28 – 23:05
  • चर(सामान्य)23:05 – 00:42 (12 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:42 (12 जन॰) – 02:19 (12 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:19 (12 जन॰) – 03:55 (12 जन॰)
  • लाभ(शुभ)03:55 (12 जन॰) – 05:32 (12 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:32 (12 जन॰) – 07:09 (12 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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