पंचांग 17 फ़रवरी 2023
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 फ़रवरी 2023 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:01
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय05:19 (18 फ़र॰)
चंद्रास्त15:25
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1944 · विक्रम (चैत्रादि) 2079
- संवत्सर:
- शुभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- धनु 01:48 (18 फ़र॰) तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 23:36 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 20:02 (18 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 20:28 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 17:42 (18 फ़र॰) तक
- योग
- सिद्धि 23:44 तक, फिर व्यतीपात 19:35 (18 फ़र॰) तक
- करण
- कौलव 13:16 तक, फिर तैतिल 23:36 तक, फिर गर 09:51 (18 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
- राहु काल11:21 – 12:48
- यमगंड15:42 – 17:09
- गुलिक काल08:28 – 09:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)07:01 – 08:28
- लाभ(शुभ)08:28 – 09:55
- अमृत(शुभ)09:55 – 11:21
- काल(वर्जित (परंपरा))11:21 – 12:48
- शुभ(शुभ)12:48 – 14:15
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:42
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:42 – 17:09
- चर(सामान्य)17:09 – 18:35
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:35 – 20:08
- काल(वर्जित (परंपरा))20:08 – 21:42
- लाभ(शुभ)21:42 – 23:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:48 (18 फ़र॰)
- शुभ(शुभ)00:48 (18 फ़र॰) – 02:21 (18 फ़र॰)
- अमृत(शुभ)02:21 (18 फ़र॰) – 03:54 (18 फ़र॰)
- चर(सामान्य)03:54 (18 फ़र॰) – 05:27 (18 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))05:27 (18 फ़र॰) – 07:00 (18 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें