पंचांग 22 नवंबर 2023
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 नवंबर 2023 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:44
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय14:22
चंद्रास्त02:37 (23 नव॰)
- मास:
- कार्तिक (अमांत)
- संवत:
- शक 1945 · विक्रम (चैत्रादि) 2080
- संवत्सर:
- शोभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- कुंभ 12:58 तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल दशमी 23:04 तक, फिर शुक्ल एकादशी 21:02 (23 नव॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 18:37 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 17:15 (23 नव॰) तक
- योग
- हर्षण 14:45 तक, फिर वज्र 11:52 (23 नव॰) तक
- करण
- तैतिल 12:07 तक, फिर गर 23:04 तक, फिर वणिज 10:03 (23 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:42परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:20 – 13:44
- यमगंड08:08 – 09:32
- गुलिक काल10:56 – 12:20
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:44 – 08:08
- अमृत(शुभ)08:08 – 09:32
- काल(वर्जित (परंपरा))09:32 – 10:56
- शुभ(शुभ)10:56 – 12:20
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:20 – 13:44
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:44 – 15:08
- चर(सामान्य)15:08 – 16:32
- लाभ(शुभ)16:32 – 17:56
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:32
- शुभ(शुभ)19:32 – 21:08
- अमृत(शुभ)21:08 – 22:44
- चर(सामान्य)22:44 – 00:20 (23 नव॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:20 (23 नव॰) – 01:56 (23 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:56 (23 नव॰) – 03:33 (23 नव॰)
- लाभ(शुभ)03:33 (23 नव॰) – 05:09 (23 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:09 (23 नव॰) – 06:45 (23 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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