पंचांग 10 दिसंबर 2023
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 दिसंबर 2023 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:55
सूर्यास्त17:58
चंद्रोदय05:09 (11 दिस॰)
चंद्रास्त15:45
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1945 · विक्रम (चैत्रादि) 2080
- संवत्सर:
- शोभकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- तुला 06:11 (11 दिस॰) तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 07:13 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 07:10 (11 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- स्वाती 11:50 तक, फिर विशाखा 12:13 (11 दिस॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 22:34 तक, फिर सुकर्मा 20:58 (11 दिस॰) तक
- करण
- तैतिल 07:13 तक, फिर गर 19:17 तक, फिर वणिज 07:10 (11 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:49
- राहु काल16:35 – 17:58
- यमगंड12:27 – 13:49
- गुलिक काल15:12 – 16:35
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:55 – 08:18
- चर(सामान्य)08:18 – 09:41
- लाभ(शुभ)09:41 – 11:04
- अमृत(शुभ)11:04 – 12:27
- काल(वर्जित (परंपरा))12:27 – 13:49
- शुभ(शुभ)13:49 – 15:12
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:12 – 16:35
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:35 – 17:58
रात
- शुभ(शुभ)17:58 – 19:35
- अमृत(शुभ)19:35 – 21:12
- चर(सामान्य)21:12 – 22:50
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:50 – 00:27 (11 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:27 (11 दिस॰) – 02:04 (11 दिस॰)
- लाभ(शुभ)02:04 (11 दिस॰) – 03:41 (11 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:41 (11 दिस॰) – 05:19 (11 दिस॰)
- शुभ(शुभ)05:19 (11 दिस॰) – 06:56 (11 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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