पंचांग 27 अगस्त 2024
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
27 अगस्त 2024 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदय00:54 (28 अग॰)
चंद्रास्त13:49
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
- संवत्सर:
- क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- वृषभ 03:41 (28 अग॰) तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 01:33 (28 अग॰) तक, फिर कृष्ण दशमी 01:20 (29 अग॰) तक
- नक्षत्र
- रोहिणी 15:38 तक, फिर मृगशीर्ष 15:53 (28 अग॰) तक
- योग
- हर्षण 20:30 तक, फिर वज्र 19:11 (28 अग॰) तक
- करण
- तैतिल 13:52 तक, फिर गर 01:33 (28 अग॰) तक, फिर वणिज 13:23 (28 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00
- राहु काल15:44 – 17:18
- यमगंड09:27 – 11:01
- गुलिक काल12:35 – 14:10
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:19 – 07:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:27
- चर(सामान्य)09:27 – 11:01
- लाभ(शुभ)11:01 – 12:35
- अमृत(शुभ)12:35 – 14:10
- काल(वर्जित (परंपरा))14:10 – 15:44
- शुभ(शुभ)15:44 – 17:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:18 – 18:52
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:52 – 20:18
- लाभ(शुभ)20:18 – 21:44
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:44 – 23:10
- शुभ(शुभ)23:10 – 00:35 (28 अग॰)
- अमृत(शुभ)00:35 (28 अग॰) – 02:01 (28 अग॰)
- चर(सामान्य)02:01 (28 अग॰) – 03:27 (28 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (28 अग॰) – 04:53 (28 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:53 (28 अग॰) – 06:19 (28 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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