पंचांग 22 जनवरी 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 जनवरी 2025 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:22
चंद्रोदय01:32 (23 जन॰)
चंद्रास्त12:18
- मास:
- पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
- संवत्सर:
- क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी 15:18 तक, फिर कृष्ण नवमी 17:38 (23 जन॰) तक
- नक्षत्र
- स्वाती 02:34 (23 जन॰) तक, फिर विशाखा 05:08 (24 जन॰) तक
- योग
- शूल 04:37 (23 जन॰) तक, फिर गण्ड 05:06 (24 जन॰) तक
- करण
- कौलव 15:18 तक, फिर तैतिल 04:31 (23 जन॰) तक, फिर गर 17:38 (23 जन॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:08परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:46 – 14:10
- यमगंड08:33 – 09:57
- गुलिक काल11:22 – 12:46
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:09 – 08:33
- अमृत(शुभ)08:33 – 09:57
- काल(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:22
- शुभ(शुभ)11:22 – 12:46
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:46 – 14:10
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:10 – 15:34
- चर(सामान्य)15:34 – 16:58
- लाभ(शुभ)16:58 – 18:22
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:22 – 19:58
- शुभ(शुभ)19:58 – 21:34
- अमृत(शुभ)21:34 – 23:10
- चर(सामान्य)23:10 – 00:46 (23 जन॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:46 (23 जन॰) – 02:22 (23 जन॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:22 (23 जन॰) – 03:57 (23 जन॰)
- लाभ(शुभ)03:57 (23 जन॰) – 05:33 (23 जन॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:33 (23 जन॰) – 07:09 (23 जन॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें