पंचांग 5 फ़रवरी 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
5 फ़रवरी 2025 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:30
चंद्रोदय11:52
चंद्रास्त01:22 (6 फ़र॰)
- मास:
- माघ (अमांत)
- संवत:
- शक 1946 · विक्रम (चैत्रादि) 2081
- संवत्सर:
- क्रोधी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- मेष 02:16 (6 फ़र॰) तक, फिर वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल अष्टमी 00:36 (6 फ़र॰) तक, फिर शुक्ल नवमी 22:54 (6 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- भरणी 20:33 तक, फिर कृत्तिका 19:29 (6 फ़र॰) तक
- योग
- शुक्ल 21:18 तक, फिर ब्रह्म 18:41 (6 फ़र॰) तक
- करण
- विष्टि 13:32 तक, फिर बव 00:36 (6 फ़र॰) तक, फिर बालव 11:43 (6 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:48 – 14:14
- यमगंड08:32 – 09:57
- गुलिक काल11:23 – 12:48
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:06 – 08:32
- अमृत(शुभ)08:32 – 09:57
- काल(वर्जित (परंपरा))09:57 – 11:23
- शुभ(शुभ)11:23 – 12:48
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:39
- चर(सामान्य)15:39 – 17:05
- लाभ(शुभ)17:05 – 18:30
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:30 – 20:05
- शुभ(शुभ)20:05 – 21:39
- अमृत(शुभ)21:39 – 23:13
- चर(सामान्य)23:13 – 00:48 (6 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:48 (6 फ़र॰) – 02:22 (6 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:22 (6 फ़र॰) – 03:57 (6 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)03:57 (6 फ़र॰) – 05:31 (6 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:31 (6 फ़र॰) – 07:06 (6 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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