पंचांग 30 जुलाई 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
30 जुलाई 2025 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:11
सूर्यास्त19:10
चंद्रोदय10:52
चंद्रास्त22:49
- मास:
- श्रावण (अमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल षष्ठी 02:42 (31 जुल॰) तक, फिर शुक्ल सप्तमी 04:58 (1 अग॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 21:53 तक, फिर चित्रा 00:41 (1 अग॰) तक
- योग
- सिद्ध 03:40 (31 जुल॰) तक, फिर साध्य 04:32 (1 अग॰) तक
- करण
- कौलव 13:41 तक, फिर तैतिल 02:42 (31 जुल॰) तक, फिर गर 15:48 (31 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:40 – 14:18
- यमगंड07:48 – 09:26
- गुलिक काल11:03 – 12:40
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:11 – 07:48
- अमृत(शुभ)07:48 – 09:26
- काल(वर्जित (परंपरा))09:26 – 11:03
- शुभ(शुभ)11:03 – 12:40
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:55
- चर(सामान्य)15:55 – 17:32
- लाभ(शुभ)17:32 – 19:10
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:10 – 20:32
- शुभ(शुभ)20:32 – 21:55
- अमृत(शुभ)21:55 – 23:18
- चर(सामान्य)23:18 – 00:41 (31 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:41 (31 जुल॰) – 02:03 (31 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (31 जुल॰) – 03:26 (31 जुल॰)
- लाभ(शुभ)03:26 (31 जुल॰) – 04:49 (31 जुल॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:49 (31 जुल॰) – 06:11 (31 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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