पंचांग 8 सितंबर 2025

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

8 सितंबर 2025 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय19:12
चंद्रास्त06:40
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कुंभ 14:29 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 21:12 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 18:29 (9 सित॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 20:02 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 18:07 (9 सित॰) तक
योग
धृति 06:30 तक, फिर शूल 03:20 (9 सित॰) तक, फिर गण्ड 23:58 (9 सित॰) तक
करण
बालव 10:28 तक, फिर कौलव 21:12 तक, फिर तैतिल 07:52 (9 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:56
  • राहु काल07:53 – 09:26
  • यमगंड10:59 – 12:32
  • गुलिक काल14:04 – 15:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:21 – 07:53
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:26
  • शुभ(शुभ)09:26 – 10:59
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:32 – 14:04
  • चर(सामान्य)14:04 – 15:37
  • लाभ(शुभ)15:37 – 17:10
  • अमृत(शुभ)17:10 – 18:43

रात

  • चर(सामान्य)18:43 – 20:10
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:10 – 21:37
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:37 – 23:04
  • लाभ(शुभ)23:04 – 00:32 (9 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:32 (9 सित॰) – 01:59 (9 सित॰)
  • शुभ(शुभ)01:59 (9 सित॰) – 03:26 (9 सित॰)
  • अमृत(शुभ)03:26 (9 सित॰) – 04:54 (9 सित॰)
  • चर(सामान्य)04:54 (9 सित॰) – 06:21 (9 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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