पंचांग 16 सितंबर 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
16 सितंबर 2025 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:36
चंद्रोदय02:06 (17 सित॰)
चंद्रास्त14:54
- मास:
- भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- मिथुन 00:28 (17 सित॰) तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 00:22 (17 सित॰) तक, फिर कृष्ण एकादशी 23:40 (17 सित॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 06:46 तक, फिर पुनर्वसु 06:26 (17 सित॰) तक
- योग
- वरीयान 00:34 (17 सित॰) तक, फिर परिघ 22:55 (17 सित॰) तक
- करण
- वणिज 12:53 तक, फिर विष्टि 00:22 (17 सित॰) तक, फिर बव 11:57 (17 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:53
- राहु काल15:32 – 17:04
- यमगंड09:25 – 10:57
- गुलिक काल12:29 – 14:00
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:22 – 07:54
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
- चर(सामान्य)09:25 – 10:57
- लाभ(शुभ)10:57 – 12:29
- अमृत(शुभ)12:29 – 14:00
- काल(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:32
- शुभ(शुभ)15:32 – 17:04
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:04 – 18:36
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:36 – 20:04
- लाभ(शुभ)20:04 – 21:32
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:32 – 23:01
- शुभ(शुभ)23:01 – 00:29 (17 सित॰)
- अमृत(शुभ)00:29 (17 सित॰) – 01:57 (17 सित॰)
- चर(सामान्य)01:57 (17 सित॰) – 03:26 (17 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:26 (17 सित॰) – 04:54 (17 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (17 सित॰) – 06:22 (17 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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