पंचांग 19 सितंबर 2025

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 सितंबर 2025 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:33
चंद्रोदय04:56 (20 सित॰)
चंद्रास्त17:06
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
कर्क 07:05 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 23:37 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 00:17 (21 सित॰) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 07:05 तक, फिर मघा 08:05 (20 सित॰) तक
योग
सिद्ध 20:41 तक, फिर साध्य 20:06 (20 सित॰) तक
करण
गर 11:27 तक, फिर वणिज 23:37 तक, फिर विष्टि 11:54 (20 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:03 – 12:52
  • राहु काल10:56 – 12:28
  • यमगंड15:30 – 17:02
  • गुलिक काल07:54 – 09:25

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:22 – 07:54
  • लाभ(शुभ)07:54 – 09:25
  • अमृत(शुभ)09:25 – 10:56
  • काल(वर्जित (परंपरा))10:56 – 12:28
  • शुभ(शुभ)12:28 – 13:59
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:59 – 15:30
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:30 – 17:02
  • चर(सामान्य)17:02 – 18:33

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:33 – 20:02
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:02 – 21:30
  • लाभ(शुभ)21:30 – 22:59
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:59 – 00:28 (20 सित॰)
  • शुभ(शुभ)00:28 (20 सित॰) – 01:56 (20 सित॰)
  • अमृत(शुभ)01:56 (20 सित॰) – 03:25 (20 सित॰)
  • चर(सामान्य)03:25 (20 सित॰) – 04:54 (20 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (20 सित॰) – 06:23 (20 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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