पंचांग 3 अक्टूबर 2025
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 अक्टूबर 2025 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:25
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदय15:45
चंद्रास्त03:25 (4 अक्टू॰)
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- मकर 21:27 तक, फिर कुंभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल एकादशी 18:33 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 17:10 (4 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- श्रवण 09:34 तक, फिर धनिष्ठा 09:09 (4 अक्टू॰) तक
- योग
- धृति 21:45 तक, फिर शूल 19:26 (4 अक्टू॰) तक
- करण
- वणिज 06:58 तक, फिर विष्टि 18:33 तक, फिर बव 05:57 (4 अक्टू॰) तक, फिर बालव 17:10 (4 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:59 – 12:47
- राहु काल10:53 – 12:23
- यमगंड15:22 – 16:51
- गुलिक काल07:54 – 09:24
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:25 – 07:54
- लाभ(शुभ)07:54 – 09:24
- अमृत(शुभ)09:24 – 10:53
- काल(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:23
- शुभ(शुभ)12:23 – 13:52
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:52 – 15:22
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:22 – 16:51
- चर(सामान्य)16:51 – 18:21
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:21 – 19:51
- काल(वर्जित (परंपरा))19:51 – 21:22
- लाभ(शुभ)21:22 – 22:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:53 – 00:23 (4 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)00:23 (4 अक्टू॰) – 01:54 (4 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)01:54 (4 अक्टू॰) – 03:24 (4 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)03:24 (4 अक्टू॰) – 04:55 (4 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:55 (4 अक्टू॰) – 06:25 (4 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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