पंचांग 4 दिसंबर 2025

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

4 दिसंबर 2025 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:52
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय17:14
चंद्रास्तनहीं
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत)
संवत:
शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
संवत्सर:
विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 08:38 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 04:44 (5 दिस॰) तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 00:56 (6 दिस॰) तक
नक्षत्र
कृत्तिका 14:54 तक, फिर रोहिणी 11:46 (5 दिस॰) तक
योग
शिव 12:34 तक, फिर सिद्ध 08:08 (5 दिस॰) तक
करण
वणिज 08:38 तक, फिर विष्टि 18:41 तक, फिर बव 04:44 (5 दिस॰) तक, फिर बालव 14:48 (5 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:46
  • राहु काल13:47 – 15:10
  • यमगंड06:52 – 08:15
  • गुलिक काल09:38 – 11:01

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:52 – 08:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:15 – 09:38
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:38 – 11:01
  • चर(सामान्य)11:01 – 12:24
  • लाभ(शुभ)12:24 – 13:47
  • अमृत(शुभ)13:47 – 15:10
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:10 – 16:33
  • शुभ(शुभ)16:33 – 17:57

रात

  • अमृत(शुभ)17:57 – 19:34
  • चर(सामान्य)19:34 – 21:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:11 – 22:48
  • काल(वर्जित (परंपरा))22:48 – 00:25 (5 दिस॰)
  • लाभ(शुभ)00:25 (5 दिस॰) – 02:01 (5 दिस॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:01 (5 दिस॰) – 03:38 (5 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)03:38 (5 दिस॰) – 05:15 (5 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)05:15 (5 दिस॰) – 06:52 (5 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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