पंचांग 12 मार्च 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
12 मार्च 2026 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:45
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय02:31 (13 मार्च)
चंद्रास्त12:39
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1947 · विक्रम (चैत्रादि) 2082
- संवत्सर:
- विश्वावसु (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 06:29 (13 मार्च) तक, फिर कृष्ण दशमी 08:11 (14 मार्च) तक
- नक्षत्र
- मूल 00:43 (13 मार्च) तक, फिर पूर्वाषाढ़ा 03:03 (14 मार्च) तक
- योग
- सिद्धि 09:58 तक, फिर व्यतीपात 10:31 (13 मार्च) तक
- करण
- तैतिल 17:27 तक, फिर गर 06:29 (13 मार्च) तक, फिर वणिज 19:24 (13 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:08
- राहु काल14:14 – 15:43
- यमगंड06:45 – 08:15
- गुलिक काल09:44 – 11:14
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:45 – 08:15
- रोग(वर्जित (परंपरा))08:15 – 09:44
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:44 – 11:14
- चर(सामान्य)11:14 – 12:44
- लाभ(शुभ)12:44 – 14:14
- अमृत(शुभ)14:14 – 15:43
- काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:13
- शुभ(शुभ)17:13 – 18:43
रात
- अमृत(शुभ)18:43 – 20:13
- चर(सामान्य)20:13 – 21:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:13
- काल(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:44 (13 मार्च)
- लाभ(शुभ)00:44 (13 मार्च) – 02:14 (13 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:14 (13 मार्च) – 03:44 (13 मार्च)
- शुभ(शुभ)03:44 (13 मार्च) – 05:14 (13 मार्च)
- अमृत(शुभ)05:14 (13 मार्च) – 06:44 (13 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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