पंचांग 7 अप्रैल 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
7 अप्रैल 2026 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय23:31
चंद्रास्त09:40
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 05:54 (8 अप्रैल) तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण पंचमी 16:35 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 19:02 (8 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 05:54 (8 अप्रैल) तक, फिर मूल 08:48 (9 अप्रैल) तक
- योग
- व्यतीपात 16:16 तक, फिर वरीयान 17:10 (8 अप्रैल) तक
- करण
- तैतिल 16:35 तक, फिर गर 05:48 (8 अप्रैल) तक, फिर वणिज 19:02 (8 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:01
- राहु काल15:43 – 17:16
- यमगंड09:30 – 11:03
- गुलिक काल12:36 – 14:10
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:24 – 07:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:57 – 09:30
- चर(सामान्य)09:30 – 11:03
- लाभ(शुभ)11:03 – 12:36
- अमृत(शुभ)12:36 – 14:10
- काल(वर्जित (परंपरा))14:10 – 15:43
- शुभ(शुभ)15:43 – 17:16
- रोग(वर्जित (परंपरा))17:16 – 18:49
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:49 – 20:16
- लाभ(शुभ)20:16 – 21:42
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:09
- शुभ(शुभ)23:09 – 00:36 (8 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)00:36 (8 अप्रैल) – 02:03 (8 अप्रैल)
- चर(सामान्य)02:03 (8 अप्रैल) – 03:29 (8 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:29 (8 अप्रैल) – 04:56 (8 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:56 (8 अप्रैल) – 06:23 (8 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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