पंचांग 11 अप्रैल 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
11 अप्रैल 2026 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय02:38 (12 अप्रैल)
चंद्रास्त13:12
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 00:38 (12 अप्रैल) तक, फिर कृष्ण दशमी 01:17 (13 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा 13:39 तक, फिर श्रवण 15:14 (12 अप्रैल) तक
- योग
- सिद्ध 18:39 तक, फिर साध्य 18:16 (12 अप्रैल) तक
- करण
- तैतिल 12:02 तक, फिर गर 00:38 (12 अप्रैल) तक, फिर वणिज 13:03 (12 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00
- राहु काल09:28 – 11:02
- यमगंड14:09 – 15:43
- गुलिक काल06:21 – 07:54
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:21 – 07:54
- शुभ(शुभ)07:54 – 09:28
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:28 – 11:02
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:02 – 12:35
- चर(सामान्य)12:35 – 14:09
- लाभ(शुभ)14:09 – 15:43
- अमृत(शुभ)15:43 – 17:16
- काल(वर्जित (परंपरा))17:16 – 18:50
रात
- लाभ(शुभ)18:50 – 20:16
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:16 – 21:42
- शुभ(शुभ)21:42 – 23:09
- अमृत(शुभ)23:09 – 00:35 (12 अप्रैल)
- चर(सामान्य)00:35 (12 अप्रैल) – 02:01 (12 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:01 (12 अप्रैल) – 03:27 (12 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (12 अप्रैल) – 04:54 (12 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)04:54 (12 अप्रैल) – 06:20 (12 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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