पंचांग 1 जुलाई 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
1 जुलाई 2026 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:01
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय20:31
चंद्रास्त06:54
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- धनु 13:31 तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण प्रतिपदा 07:38 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 09:38 (2 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा 06:51 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 09:27 (2 जुल॰) तक
- योग
- इन्द्र 16:04 तक, फिर वैधृति 16:39 (2 जुल॰) तक
- करण
- कौलव 07:38 तक, फिर तैतिल 20:40 तक, फिर गर 09:38 (2 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:04परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:38 – 14:17
- यमगंड07:40 – 09:20
- गुलिक काल10:59 – 12:38
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:01 – 07:40
- अमृत(शुभ)07:40 – 09:20
- काल(वर्जित (परंपरा))09:20 – 10:59
- शुभ(शुभ)10:59 – 12:38
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:17
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:17 – 15:56
- चर(सामान्य)15:56 – 17:35
- लाभ(शुभ)17:35 – 19:15
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:35
- शुभ(शुभ)20:35 – 21:56
- अमृत(शुभ)21:56 – 23:17
- चर(सामान्य)23:17 – 00:38 (2 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:38 (2 जुल॰) – 01:59 (2 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:59 (2 जुल॰) – 03:20 (2 जुल॰)
- लाभ(शुभ)03:20 (2 जुल॰) – 04:41 (2 जुल॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:41 (2 जुल॰) – 06:01 (2 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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