पंचांग 8 जुलाई 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
8 जुलाई 2026 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:03
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय00:49 (9 जुल॰)
चंद्रास्त13:03
- मास:
- ज्येष्ठ (अमांत) · आषाढ़ (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मिथुन
- चंद्र राशि:
- मीन 16:00 तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण अष्टमी 12:22 तक, फिर कृष्ण नवमी 10:38 (9 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- रेवती 16:00 तक, फिर अश्विनी 14:56 (9 जुल॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 12:38 तक, फिर सुकर्मा 10:12 (9 जुल॰) तक
- करण
- कौलव 12:22 तक, फिर तैतिल 23:35 तक, फिर गर 10:38 (9 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:05परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:39 – 14:18
- यमगंड07:42 – 09:21
- गुलिक काल11:00 – 12:39
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:03 – 07:42
- अमृत(शुभ)07:42 – 09:21
- काल(वर्जित (परंपरा))09:21 – 11:00
- शुभ(शुभ)11:00 – 12:39
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:57
- चर(सामान्य)15:57 – 17:36
- लाभ(शुभ)17:36 – 19:15
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:36
- शुभ(शुभ)20:36 – 21:57
- अमृत(शुभ)21:57 – 23:18
- चर(सामान्य)23:18 – 00:39 (9 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:39 (9 जुल॰) – 02:00 (9 जुल॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:00 (9 जुल॰) – 03:21 (9 जुल॰)
- लाभ(शुभ)03:21 (9 जुल॰) – 04:43 (9 जुल॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:43 (9 जुल॰) – 06:04 (9 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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