पंचांग 17 जुलाई 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
17 जुलाई 2026 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:07
सूर्यास्त19:14
चंद्रोदय08:56
चंद्रास्त21:44
- मास:
- आषाढ़ (अमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- ग्रीष्म · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 06:28 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 04:43 (18 जुल॰) तक, फिर शुक्ल पंचमी 03:43 (19 जुल॰) तक
- नक्षत्र
- मघा 18:34 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 18:00 (18 जुल॰) तक
- योग
- व्यतीपात 22:46 तक, फिर वरीयान 20:45 (18 जुल॰) तक
- करण
- गर 06:28 तक, फिर वणिज 17:30 तक, फिर विष्टि 04:43 (18 जुल॰) तक, फिर बव 16:07 (18 जुल॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:06
- राहु काल11:02 – 12:40
- यमगंड15:57 – 17:35
- गुलिक काल07:45 – 09:23
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:07 – 07:45
- लाभ(शुभ)07:45 – 09:23
- अमृत(शुभ)09:23 – 11:02
- काल(वर्जित (परंपरा))11:02 – 12:40
- शुभ(शुभ)12:40 – 14:19
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:19 – 15:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:57 – 17:35
- चर(सामान्य)17:35 – 19:14
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:14 – 20:35
- काल(वर्जित (परंपरा))20:35 – 21:57
- लाभ(शुभ)21:57 – 23:19
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:19 – 00:40 (18 जुल॰)
- शुभ(शुभ)00:40 (18 जुल॰) – 02:02 (18 जुल॰)
- अमृत(शुभ)02:02 (18 जुल॰) – 03:24 (18 जुल॰)
- चर(सामान्य)03:24 (18 जुल॰) – 04:45 (18 जुल॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:45 (18 जुल॰) – 06:07 (18 जुल॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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