पंचांग 29 सितंबर 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 सितंबर 2026 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:24
चंद्रोदय20:12
चंद्रास्त08:41
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 17:10 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 14:55 (30 सित॰) तक
नक्षत्र
अश्विनी 09:03 तक, फिर भरणी 07:37 (30 सित॰) तक
योग
हर्षण 03:20 (30 सित॰) तक, फिर वज्र 00:20 (1 अक्टू॰) तक
करण
विष्टि 17:10 तक, फिर बव 04:04 (30 सित॰) तक, फिर बालव 14:55 (30 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48
  • राहु काल15:24 – 16:54
  • यमगंड09:24 – 10:54
  • गुलिक काल12:24 – 13:54

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:24 – 07:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:54
  • लाभ(शुभ)10:54 – 12:24
  • अमृत(शुभ)12:24 – 13:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:54 – 15:24
  • शुभ(शुभ)15:24 – 16:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:54 – 18:24

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:24 – 19:54
  • लाभ(शुभ)19:54 – 21:24
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:24 – 22:54
  • शुभ(शुभ)22:54 – 00:24 (30 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:24 (30 सित॰) – 01:54 (30 सित॰)
  • चर(सामान्य)01:54 (30 सित॰) – 03:24 (30 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (30 सित॰) – 04:54 (30 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (30 सित॰) – 06:24 (30 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें