पंचांग 13 अक्टूबर 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 अक्टूबर 2026 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:13
चंद्रोदय08:39
चंद्रास्त19:54
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
तुला 19:12 तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 23:28 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 01:13 (15 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
विशाखा 01:43 (14 अक्टू॰) तक, फिर अनुराधा 04:03 (15 अक्टू॰) तक
योग
प्रीति 20:24 तक, फिर आयुष्मान 20:39 (14 अक्टू॰) तक
करण
तैतिल 10:46 तक, फिर गर 23:28 तक, फिर वणिज 12:17 (14 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:44
  • राहु काल15:17 – 16:45
  • यमगंड09:24 – 10:52
  • गुलिक काल12:20 – 13:48

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:27 – 07:56
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:56 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:52
  • लाभ(शुभ)10:52 – 12:20
  • अमृत(शुभ)12:20 – 13:48
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:48 – 15:17
  • शुभ(शुभ)15:17 – 16:45
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:45 – 18:13

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:13 – 19:45
  • लाभ(शुभ)19:45 – 21:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:17 – 22:49
  • शुभ(शुभ)22:49 – 00:20 (14 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)00:20 (14 अक्टू॰) – 01:52 (14 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)01:52 (14 अक्टू॰) – 03:24 (14 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (14 अक्टू॰) – 04:56 (14 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:56 (14 अक्टू॰) – 06:28 (14 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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