पंचांग 16 अक्टूबर 2026
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
16 अक्टूबर 2026 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:28
सूर्यास्त18:11
चंद्रोदय11:20
चंद्रास्त22:21
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 06:47 तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल षष्ठी 05:54 (17 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल सप्तमी 08:28 (18 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 06:47 तक, फिर मूल 09:47 (17 अक्टू॰) तक
- योग
- शोभन 22:05 तक, फिर अतिगण्ड 23:02 (17 अक्टू॰) तक
- करण
- कौलव 16:38 तक, फिर तैतिल 05:54 (17 अक्टू॰) तक, फिर गर 19:12 (17 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:56 – 12:43
- राहु काल10:52 – 12:20
- यमगंड15:15 – 16:43
- गुलिक काल07:56 – 09:24
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:28 – 07:56
- लाभ(शुभ)07:56 – 09:24
- अमृत(शुभ)09:24 – 10:52
- काल(वर्जित (परंपरा))10:52 – 12:20
- शुभ(शुभ)12:20 – 13:47
- रोग(वर्जित (परंपरा))13:47 – 15:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:15 – 16:43
- चर(सामान्य)16:43 – 18:11
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:11 – 19:43
- काल(वर्जित (परंपरा))19:43 – 21:15
- लाभ(शुभ)21:15 – 22:48
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))22:48 – 00:20 (17 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)00:20 (17 अक्टू॰) – 01:52 (17 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)01:52 (17 अक्टू॰) – 03:24 (17 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)03:24 (17 अक्टू॰) – 04:56 (17 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:56 (17 अक्टू॰) – 06:28 (17 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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