पंचांग 31 अक्टूबर 2026

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 अक्टूबर 2026 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:33
सूर्यास्त18:02
चंद्रोदय23:04
चंद्रास्त11:47
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
तुला
चंद्र राशि:
मिथुन 00:00 (1 नव॰) तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 16:57 तक, फिर कृष्ण सप्तमी 14:52 (1 नव॰) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 07:12 तक, फिर पुनर्वसु 05:39 (1 नव॰) तक, फिर पुष्य 04:30 (2 नव॰) तक
योग
सिद्ध 17:31 तक, फिर साध्य 14:39 (1 नव॰) तक
करण
वणिज 16:57 तक, फिर विष्टि 03:52 (1 नव॰) तक, फिर बव 14:52 (1 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
  • राहु काल09:25 – 10:51
  • यमगंड13:44 – 15:10
  • गुलिक काल06:33 – 07:59

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:33 – 07:59
  • शुभ(शुभ)07:59 – 09:25
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:51
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:18
  • चर(सामान्य)12:18 – 13:44
  • लाभ(शुभ)13:44 – 15:10
  • अमृत(शुभ)15:10 – 16:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:36 – 18:02

रात

  • लाभ(शुभ)18:02 – 19:36
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:36 – 21:10
  • शुभ(शुभ)21:10 – 22:44
  • अमृत(शुभ)22:44 – 00:18 (1 नव॰)
  • चर(सामान्य)00:18 (1 नव॰) – 01:52 (1 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:52 (1 नव॰) – 03:26 (1 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:26 (1 नव॰) – 05:00 (1 नव॰)
  • लाभ(शुभ)05:00 (1 नव॰) – 06:34 (1 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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