पंचांग 19 जनवरी 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

19 जनवरी 2027 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:20
चंद्रोदय14:54
चंद्रास्त04:49 (20 जन॰)
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
वृषभ 05:38 (20 जन॰) तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 07:50 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 04:41 (20 जन॰) तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 01:12 (21 जन॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 18:54 तक, फिर मृगशीर्ष 16:17 (20 जन॰) तक
योग
ब्रह्म 02:27 (20 जन॰) तक, फिर इन्द्र 22:23 (20 जन॰) तक
करण
विष्टि 07:50 तक, फिर बव 18:19 तक, फिर बालव 04:41 (20 जन॰) तक, फिर कौलव 14:59 (20 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:22 – 13:07
  • राहु काल15:32 – 16:56
  • यमगंड09:57 – 11:21
  • गुलिक काल12:45 – 14:09

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:09 – 08:33
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:57
  • चर(सामान्य)09:57 – 11:21
  • लाभ(शुभ)11:21 – 12:45
  • अमृत(शुभ)12:45 – 14:09
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:32
  • शुभ(शुभ)15:32 – 16:56
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:56 – 18:20

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:20 – 19:56
  • लाभ(शुभ)19:56 – 21:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:32 – 23:09
  • शुभ(शुभ)23:09 – 00:45 (20 जन॰)
  • अमृत(शुभ)00:45 (20 जन॰) – 02:21 (20 जन॰)
  • चर(सामान्य)02:21 (20 जन॰) – 03:57 (20 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:57 (20 जन॰) – 05:33 (20 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:33 (20 जन॰) – 07:09 (20 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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