पंचांग 27 जनवरी 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 जनवरी 2027 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:25
चंद्रोदय23:19
चंद्रास्त10:29
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 03:54 (28 जन॰) तक, फिर कृष्ण सप्तमी 04:03 (29 जन॰) तक
नक्षत्र
हस्त 23:56 तक, फिर चित्रा 00:32 (29 जन॰) तक
योग
सुकर्मा 18:19 तक, फिर धृति 16:57 (28 जन॰) तक
करण
गर 16:08 तक, फिर वणिज 03:54 (28 जन॰) तक, फिर विष्टि 15:52 (28 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:24 – 13:09परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:47 – 14:11
  • यमगंड08:33 – 09:58
  • गुलिक काल11:22 – 12:47

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:09 – 08:33
  • अमृत(शुभ)08:33 – 09:58
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:58 – 11:22
  • शुभ(शुभ)11:22 – 12:47
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:47 – 14:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:36
  • चर(सामान्य)15:36 – 17:00
  • लाभ(शुभ)17:00 – 18:25

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:25 – 20:00
  • शुभ(शुभ)20:00 – 21:36
  • अमृत(शुभ)21:36 – 23:11
  • चर(सामान्य)23:11 – 00:47 (28 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:47 (28 जन॰) – 02:22 (28 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:22 (28 जन॰) – 03:58 (28 जन॰)
  • लाभ(शुभ)03:58 (28 जन॰) – 05:33 (28 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:33 (28 जन॰) – 07:09 (28 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें