पंचांग 10 फ़रवरी 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 फ़रवरी 2027 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:04
सूर्यास्त18:32
चंद्रोदय09:06
चंद्रास्त21:40
- मास:
- माघ (अमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मकर
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्थी 03:05 (11 फ़र॰) तक, फिर शुक्ल पंचमी 03:18 (12 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 04:56 (11 फ़र॰) तक, फिर रेवती 05:42 (12 फ़र॰) तक
- योग
- सिद्ध 21:13 तक, फिर साध्य 20:20 (11 फ़र॰) तक
- करण
- वणिज 14:46 तक, फिर विष्टि 03:05 (11 फ़र॰) तक, फिर बव 15:15 (11 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:48 – 14:14
- यमगंड08:30 – 09:56
- गुलिक काल11:22 – 12:48
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)07:04 – 08:30
- अमृत(शुभ)08:30 – 09:56
- काल(वर्जित (परंपरा))09:56 – 11:22
- शुभ(शुभ)11:22 – 12:48
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:40
- चर(सामान्य)15:40 – 17:06
- लाभ(शुभ)17:06 – 18:32
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:32 – 20:06
- शुभ(शुभ)20:06 – 21:40
- अमृत(शुभ)21:40 – 23:14
- चर(सामान्य)23:14 – 00:48 (11 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:48 (11 फ़र॰) – 02:22 (11 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:22 (11 फ़र॰) – 03:56 (11 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)03:56 (11 फ़र॰) – 05:30 (11 फ़र॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:30 (11 फ़र॰) – 07:04 (11 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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