पंचांग 16 फ़रवरी 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

16 फ़रवरी 2027 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:35
चंद्रोदय13:42
चंद्रास्त03:36 (17 फ़र॰)
मास:
माघ (अमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
वृषभ 14:35 तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल दशमी 20:19 तक, फिर शुक्ल एकादशी 17:32 (17 फ़र॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 01:38 (17 फ़र॰) तक, फिर आर्द्रा 23:29 (17 फ़र॰) तक
योग
वैधृति 09:34 तक, फिर विष्कम्भ 06:14 (17 फ़र॰) तक, फिर प्रीति 02:38 (18 फ़र॰) तक
करण
तैतिल 09:35 तक, फिर गर 20:19 तक, फिर वणिज 06:58 (17 फ़र॰) तक, फिर विष्टि 17:32 (17 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल15:42 – 17:08
  • यमगंड09:55 – 11:22
  • गुलिक काल12:48 – 14:15

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:02 – 08:28
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:28 – 09:55
  • चर(सामान्य)09:55 – 11:22
  • लाभ(शुभ)11:22 – 12:48
  • अमृत(शुभ)12:48 – 14:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:42
  • शुभ(शुभ)15:42 – 17:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:08 – 18:35

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:35 – 20:08
  • लाभ(शुभ)20:08 – 21:41
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:41 – 23:15
  • शुभ(शुभ)23:15 – 00:48 (17 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)00:48 (17 फ़र॰) – 02:21 (17 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)02:21 (17 फ़र॰) – 03:54 (17 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:54 (17 फ़र॰) – 05:28 (17 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:28 (17 फ़र॰) – 07:01 (17 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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