पंचांग 21 फ़रवरी 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

21 फ़रवरी 2027 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय19:08
चंद्रास्त07:02
मास:
माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
संवत्सर:
पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 02:03 (22 फ़र॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 23:39 (22 फ़र॰) तक
नक्षत्र
मघा 13:51 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 11:55 (22 फ़र॰) तक
योग
अतिगण्ड 11:27 तक, फिर सुकर्मा 08:02 (22 फ़र॰) तक
करण
बालव 15:26 तक, फिर कौलव 02:03 (22 फ़र॰) तक, फिर तैतिल 12:47 (22 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल17:10 – 18:37
  • यमगंड12:48 – 14:15
  • गुलिक काल15:42 – 17:10

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:59 – 08:26
  • चर(सामान्य)08:26 – 09:53
  • लाभ(शुभ)09:53 – 11:21
  • अमृत(शुभ)11:21 – 12:48
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:48 – 14:15
  • शुभ(शुभ)14:15 – 15:42
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:42 – 17:10
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:10 – 18:37

रात

  • शुभ(शुभ)18:37 – 20:10
  • अमृत(शुभ)20:10 – 21:42
  • चर(सामान्य)21:42 – 23:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:47 (22 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:47 (22 फ़र॰) – 02:20 (22 फ़र॰)
  • लाभ(शुभ)02:20 (22 फ़र॰) – 03:53 (22 फ़र॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:53 (22 फ़र॰) – 05:25 (22 फ़र॰)
  • शुभ(शुभ)05:25 (22 फ़र॰) – 06:58 (22 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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