पंचांग 10 मार्च 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 मार्च 2027 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:47
सूर्यास्त18:42
चंद्रोदय07:42
चंद्रास्त20:28
- मास:
- फाल्गुन (अमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 15:53 तक, फिर शुक्ल तृतीया 15:38 (11 मार्च) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 10:52 तक, फिर रेवती 11:20 (11 मार्च) तक
- योग
- शुक्ल 00:50 (11 मार्च) तक, फिर ब्रह्म 23:22 (11 मार्च) तक
- करण
- कौलव 15:53 तक, फिर तैतिल 03:49 (11 मार्च) तक, फिर गर 15:38 (11 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:21 – 13:08परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:45 – 14:14
- यमगंड08:16 – 09:46
- गुलिक काल11:15 – 12:45
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:47 – 08:16
- अमृत(शुभ)08:16 – 09:46
- काल(वर्जित (परंपरा))09:46 – 11:15
- शुभ(शुभ)11:15 – 12:45
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:45 – 14:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:13
- लाभ(शुभ)17:13 – 18:42
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:42 – 20:13
- शुभ(शुभ)20:13 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:14
- चर(सामान्य)23:14 – 00:44 (11 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:44 (11 मार्च) – 02:15 (11 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:15 (11 मार्च) – 03:45 (11 मार्च)
- लाभ(शुभ)03:45 (11 मार्च) – 05:15 (11 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:15 (11 मार्च) – 06:46 (11 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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