पंचांग 31 मार्च 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
31 मार्च 2027 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय02:43 (1 अप्रैल)
चंद्रास्त13:13
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1948 · विक्रम (चैत्रादि) 2083
- संवत्सर:
- पराभव (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- धनु 13:07 तक, फिर मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 22:16 तक, फिर कृष्ण दशमी 00:45 (2 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा 09:25 (1 अप्रैल) तक
- योग
- परिघ 07:53 तक, फिर शिव 08:52 (1 अप्रैल) तक
- करण
- तैतिल 08:58 तक, फिर गर 22:16 तक, फिर वणिज 11:33 (1 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:03परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:38 – 14:11
- यमगंड08:02 – 09:34
- गुलिक काल11:06 – 12:38
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:30 – 08:02
- अमृत(शुभ)08:02 – 09:34
- काल(वर्जित (परंपरा))09:34 – 11:06
- शुभ(शुभ)11:06 – 12:38
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:11
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:15
- लाभ(शुभ)17:15 – 18:47
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:47 – 20:15
- शुभ(शुभ)20:15 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:10
- चर(सामान्य)23:10 – 00:38 (1 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:38 (1 अप्रैल) – 02:06 (1 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:06 (1 अप्रैल) – 03:33 (1 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)03:33 (1 अप्रैल) – 05:01 (1 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:01 (1 अप्रैल) – 06:29 (1 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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