पंचांग 7 अप्रैल 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
7 अप्रैल 2027 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त19:15
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मीन 18:25 तक, फिर मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल प्रतिपदा 04:29 (8 अप्रैल) तक, फिर शुक्ल द्वितीया 03:10 (9 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- रेवती 18:25 तक, फिर अश्विनी 17:59 (8 अप्रैल) तक
- योग
- इन्द्र 07:26 तक, फिर वैधृति 05:36 (8 अप्रैल) तक, फिर विष्कम्भ 03:25 (9 अप्रैल) तक
- करण
- किंस्तुघ्न 16:58 तक, फिर बव 04:29 (8 अप्रैल) तक, फिर बालव 15:52 (8 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:12 – 13:01परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:36 – 14:10
- यमगंड07:57 – 09:30
- गुलिक काल11:03 – 12:36
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:24 – 07:57
- अमृत(शुभ)07:57 – 09:30
- काल(वर्जित (परंपरा))09:30 – 11:03
- शुभ(शुभ)11:03 – 12:36
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:36 – 14:10
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:10 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:16
- लाभ(शुभ)17:16 – 18:49
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:49 – 20:16
- शुभ(शुभ)20:16 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:09
- चर(सामान्य)23:09 – 00:36 (8 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:36 (8 अप्रैल) – 02:03 (8 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (8 अप्रैल) – 03:30 (8 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)03:30 (8 अप्रैल) – 04:56 (8 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:56 (8 अप्रैल) – 06:23 (8 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें