पंचांग 13 अप्रैल 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 अप्रैल 2027 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय11:35
चंद्रास्त01:17 (14 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मिथुन 05:12 (14 अप्रैल) तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 17:29 तक, फिर शुक्ल अष्टमी 15:24 (14 अप्रैल) तक
नक्षत्र
आर्द्रा 12:13 तक, फिर पुनर्वसु 10:52 (14 अप्रैल) तक
योग
अतिगण्ड 13:59 तक, फिर सुकर्मा 11:10 (14 अप्रैल) तक
करण
गर 06:32 तक, फिर वणिज 17:29 तक, फिर विष्टि 04:26 (14 अप्रैल) तक, फिर बव 15:24 (14 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00
  • राहु काल15:43 – 17:17
  • यमगंड09:27 – 11:01
  • गुलिक काल12:35 – 14:09

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:19 – 07:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:27
  • चर(सामान्य)09:27 – 11:01
  • लाभ(शुभ)11:01 – 12:35
  • अमृत(शुभ)12:35 – 14:09
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:17 – 18:50

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:50 – 20:16
  • लाभ(शुभ)20:16 – 21:42
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:08
  • शुभ(शुभ)23:08 – 00:34 (14 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)00:34 (14 अप्रैल) – 02:00 (14 अप्रैल)
  • चर(सामान्य)02:00 (14 अप्रैल) – 03:26 (14 अप्रैल)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:26 (14 अप्रैल) – 04:52 (14 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:52 (14 अप्रैल) – 06:18 (14 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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