पंचांग 18 अप्रैल 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 अप्रैल 2027 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:15
सूर्यास्त18:52
चंद्रोदय16:35
चंद्रास्त04:48 (19 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
सिंह 11:52 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 07:42 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 06:08 (19 अप्रैल) तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 04:51 (20 अप्रैल) तक
नक्षत्र
उत्तराफाल्गुनी 05:15 (19 अप्रैल) तक, फिर हस्त 04:40 (20 अप्रैल) तक
योग
ध्रुव 21:58 तक, फिर व्याघात 19:44 (19 अप्रैल) तक
करण
बालव 07:42 तक, फिर कौलव 18:53 तक, फिर तैतिल 06:08 (19 अप्रैल) तक, फिर गर 17:27 (19 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:59
  • राहु काल17:17 – 18:52
  • यमगंड12:34 – 14:08
  • गुलिक काल15:43 – 17:17

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:15 – 07:50
  • चर(सामान्य)07:50 – 09:25
  • लाभ(शुभ)09:25 – 10:59
  • अमृत(शुभ)10:59 – 12:34
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:34 – 14:08
  • शुभ(शुभ)14:08 – 15:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:17 – 18:52

रात

  • शुभ(शुभ)18:52 – 20:17
  • अमृत(शुभ)20:17 – 21:43
  • चर(सामान्य)21:43 – 23:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:33 (19 अप्रैल)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:33 (19 अप्रैल) – 01:59 (19 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)01:59 (19 अप्रैल) – 03:24 (19 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (19 अप्रैल) – 04:49 (19 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)04:49 (19 अप्रैल) – 06:15 (19 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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