पंचांग 28 अप्रैल 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
28 अप्रैल 2027 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:09
सूर्यास्त18:55
चंद्रोदय01:18 (29 अप्रैल)
चंद्रास्त11:56
- मास:
- चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मेष
- चंद्र राशि:
- मकर
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण सप्तमी 12:31 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 15:02 (29 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- उत्तराषाढ़ा 17:30 तक, फिर श्रवण 20:30 (29 अप्रैल) तक
- योग
- साध्य 16:44 तक, फिर शुभ 17:42 (29 अप्रैल) तक
- करण
- बव 12:31 तक, फिर बालव 01:48 (29 अप्रैल) तक, फिर कौलव 15:02 (29 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:57परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:32 – 14:07
- यमगंड07:45 – 09:20
- गुलिक काल10:56 – 12:32
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:09 – 07:45
- अमृत(शुभ)07:45 – 09:20
- काल(वर्जित (परंपरा))09:20 – 10:56
- शुभ(शुभ)10:56 – 12:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:32 – 14:07
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:19
- लाभ(शुभ)17:19 – 18:55
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:55 – 20:19
- शुभ(शुभ)20:19 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:07
- चर(सामान्य)23:07 – 00:31 (29 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:31 (29 अप्रैल) – 01:56 (29 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:56 (29 अप्रैल) – 03:20 (29 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)03:20 (29 अप्रैल) – 04:44 (29 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:44 (29 अप्रैल) – 06:08 (29 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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