पंचांग 26 अक्टूबर 2027
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 अक्टूबर 2027 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:05
चंद्रोदय04:09 (27 अक्टू॰)
चंद्रास्त15:39
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
- संवत्सर:
- प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- सिंह 20:10 तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 01:04 (27 अक्टू॰) तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 22:50 (27 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाफाल्गुनी 14:34 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 13:01 (27 अक्टू॰) तक
- योग
- ब्रह्म 11:44 तक, फिर इन्द्र 08:42 (27 अक्टू॰) तक
- करण
- कौलव 14:12 तक, फिर तैतिल 01:04 (27 अक्टू॰) तक, फिर गर 11:56 (27 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41
- राहु काल15:11 – 16:38
- यमगंड09:25 – 10:51
- गुलिक काल12:18 – 13:45
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:31 – 07:58
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:58 – 09:25
- चर(सामान्य)09:25 – 10:51
- लाभ(शुभ)10:51 – 12:18
- अमृत(शुभ)12:18 – 13:45
- काल(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:11
- शुभ(शुभ)15:11 – 16:38
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:38 – 18:05
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:05 – 19:38
- लाभ(शुभ)19:38 – 21:11
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:11 – 22:45
- शुभ(शुभ)22:45 – 00:18 (27 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)00:18 (27 अक्टू॰) – 01:52 (27 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)01:52 (27 अक्टू॰) – 03:25 (27 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:25 (27 अक्टू॰) – 04:58 (27 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))04:58 (27 अक्टू॰) – 06:32 (27 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें